Pregnancy के बाद पेट मोटापे को ऐसे करें कम योग और व्यायाम से

ज्यादातर महिलाये गर्भवस्था के बाद ये बात में सोचकर परेशान रहती है की बच्चे को जन्म देने के बाद कैसे अपने शरीर के वजन को काम किया जाय और पेट को जल्दी से जल्दी अपनी जगह पर लाया जाय। वैसे देखा जाय तो डिलीवरी के बाद किसी भी महिला के पेट को अपनी स्थिति में आने के लिए समय लगता है। क्यूंकि जब गर्भवस्था के समय महिला के पेट में शिशु होने की वजह से दिनों दिन ९ महीने तक रहता है तो उसका शरीर का आकर बढ़ने से महिला के पेट का आकर भी बढ़ता रहता है। इसलिए इस पेट को इतनी जल्दी काम समय में काम करना इतना आसान नहीं है। लेकिन आप खान पान और व्यायाम को अपने दिनचर्या में जोड़ ले तो आपको Pregnancy के बाद weight को घटाने और पेट को कम करने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। इसलिए आज हम आपको कुछ ऐसे योग स्टेप्स बताने जा रहे है जिनकी मदद से आप अपने शरीर के वजन मोटापे को कम समय में कम कर सकते है।  Delivery बच्चे के पैदा होने के बाद योग से करे पेट मोटापे को कम

प्रेगनेंसी के बाद पेट कम करने के लिए योग

आज कल के मॉडर्न ज़माने में हर कोई महिला हो या पुरुष अपने शरीर को फिट और स्वस्थ रखना चाहते है जिसके लिए जरूरी है की आपकी डाइट प्लान संतुलित, रोजाना एक्सरसाइज और योगासन हो जिनकी मदद से आप अपने आप को स्लिम और कई बीमारियों से बचा सकती हो। व्यायाम शरीर की मांसपेशियों को मजबूत करने, तनाव को कम करने और रोगों के जोखिम को कम करने में मदद करता है। योग भी माताओं के स्वास्थ्य में सुधार लाने में मदद करता है और गर्भावस्था की जटिलताओं को कम करता है यह प्रसव के बाद वसूली को तेज करने में भी मदद करता है, बाद के जटिल जटिलताओं और दर्द से राहत और स्वस्थ तरीके से वजन घटाने को बढ़ावा देता है।

गर्भावस्था के बाद योग करने के लाभ

माँ बनना किसी भी महिला के लिए एक नए जीवन की शुरुवात है। योग हमारे पहले की अवस्था और गर्भवस्था के बाद की अवस्था के बीच संतुलन लेन में मदद करता है। लेकिन चोटों और जटिलताओं से बचने के लिए 6 महीने की प्रसव के बाद योग करना शुरू करना सबसे अच्छा है।

जल्दी से जल्दी रिकवरी होती है।

प्रसव के तनाव और बच्चे को नौ महीने गर्भ में पालने से शरीर पर बहुत दबाब होता है और शरीर में बहुत दर्द होता है। इसलिए इस दर्द और आलस्य को दूर करने के लिए योगासन और प्राणायाम बहुत जल्दी आपके इन दर्दो को दूर करते हुए आपके पेट को काम करने में मदद करते है। पीठ के निचले हिस्से से पीठ से पीड़ित होता है और कंधे, हाथ, पीठ, कूल्हे और पैरों के तनावपूर्ण मांसपेशियों को दिलासा देता है।

डिलिवरी के बाद वजन घटाने में मदद करता है।

गर्भावस्था के बाद ज्यादातर महिलाये बच्चे को जन्म देने के बाद इस समस्या से पीड़ित होती है की उनका वजन ज्यादा हो जाता है। योग मांसपेशियों को टर्निग और पेट के वजन और अतिरिक्त वसा को काम करने का एक प्रभावी तरीका है। यह गर्भवस्था के बाद धीरे-धीरे वजन काम करने का आदर्श है। ज्यादातर ऐसे योग के स्टेप्स करे जिनसे आपके पेट पर दबाब पढता हो जिससे आपका पेट जल्दी ही अपनी स्थिति में आ जाये।

धीरज में सुधार

बच्चे को जन्म देने के बाद माँ का शरीर शारीरिक रूप से कमजोर और मानसिक रूप से सहनशक्ति में कमी आ जाती है। पहली बार माँ बनाने वाली महिलाये ज्यादातर अधिक थकन, मांसपेशियों और जोड़ो में दर्द के बारे में शिकायत करती रहती है। गर्भवस्था के बाद योग के अभ्यास से तनावपूर्ण मांसपेशिया खींचती है और साथ ही आपको धीरज और ताकत देती है। जिससे आपके अंदर शारीरिक और मानसिक रूप से नयी ऊर्जा मिलती है।

टेंशन कम होती है 

बच्चा पैदा करने के बाद बहुत सी महिला हर वक़्त tension में रहती है, जिसके चलते वे अपने शरीर को बहुत कमजोर बना देती है और साथ ही उनमे चिड़चिड़ापन आ जाता है। टेंशन लेने से सिर्फ आपको शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान रहेंगे। जिससे आपके बच्चे पर भी बुरा असर पढ़ सकता है।

आसन में सुधार

गर्भवस्था के अधिक प्रभाव पढ़ने से माँ के आसान में ज्यादा दिक्कत आती है। बच्चे को उठाने, ले जाने सुलाने से अक्सर महिलाओं के रीढ़ की हड्डी और पीठ की मासपेशियो में टोल हो जाती है। जिससे आसान को दिक्कत आती है। गर्भवस्था के पहले और बाद में योग का नियमित अभ्यास करने से कंधे, छाती और हाथ-पैरो के जोड़े खुल जाते है।

बच्चा होने के बाद ऐसे घटाएं वजन – पेट को करें काम

गर्भावस्था के बाद अधिक वजन और पेट को काम करने के लिए योग से ज्यादा सुरक्षित कोई और तरीका नहीं है इसके ज्यादा दुष्परिणाम भी नहीं होते है। इसलिए योग करे और शरीर को स्वस्थ और मजबूत बनाये।

1. भूजंगसन (Cobra Pose)

गर्भवास्था के बाद पीठ दर्द जो की गर्भवती महिला के लिए एक आम समस्या है को कम करने के लिए भुजंगासन सबसे प्रभावी योगाभ्यास है। यह स्तनों, कंधो और रीढ़ की हड्डी को मजबूत करता है साथ ही साथ रक्त और ऑक्सीज़न संचालन में सुधर करता है।

विधि: इस आसान को करने के लिए आप सबसे पहले एक हवादार जगह पर चटाई बिछाये। उसके बाद आप पेट के बल लेट जाये और हथेली को कंधे के सीध में लाये। दोनों पैरो के बीच की दुरी को काम करे और सीधा तना हुआ रखे। अब सांस लेते हुए शरीर के अगले भाग को नाभि तक उठाये। इस स्टेप को करते हुए आप धीरे-धीरे सांस ले और धीरे-धीरे सांस छोड़े और पहली स्थिति में आते हुए गहरी सांस को छोड़ते है। पहली बार करने पर आप इसे कम से कम बार करे। जिससे आपके शरीर को कोई समस्या नहीं करनी पड़े।

2. बाघ मुद्रा (Tiger Pose)

बच्चे को जन्म देने के बाद बाघ मुद्रा महिलाओ के लिए बेहद फायदेमंद है। यह गर्भवस्था के बाद पीठ दर्द से रहत, यौन अंगो सही, हाथ-पैरो और कंधो की मांसपेशियों को ठीक, वजन घटने और पाचन क्रिया में सुधर लेन में काफी मददगार है। बाघ मुद्रा Pregnancy Ke Baad Pet Ko Kam Karne Ka Tarika

विधि: इसे करने के लिए आप एक चटाई बिछाये और उसपे घुटनो और हाथो के बल हो जाये। अब आप अपने बाये घुटने को उठाये और अपने सर को झुकने के छाती की और ले जाये। अब आप अपने पैर की ऊगली को अपने बाये हाथ की ऊँगली से पकडे और अपने सर को उप्पर की ओर उठाये। इस स्थिति में आप ४ से ५ सेकेंड तक रह सकते है अब अब आप अपनी पहली स्थिति में आकर दोबारा दूसरे पेअर को उठाते हुए दोबारा वही स्टेप्स करे।

3. कबूतर मुद्रा (राजाकपोतासन)

कबूतर मुद्रा शरीर के निचले हिस्से जांघों और पैर की मांसपेशियों लचीलेपन करने में मदद करता है यह चिंता और तनाव से रहत में मदद करता है। यह आपके हिप को लचीला बनता है और निचले बहगो की कठोरता को काम करता है।  गर्भवस्था के बाद कई महिलाओ के मूत्र संक्रमण होता है उनके इस बीमारी को सही करता है।

Pigeon Pose se kare delivery ke baad vajan ko kam

विधि: चटाई पर बैठे और दये पेअर को सर की तरफ मोड साथ ही पैसे से उसे सिर तक मिलाने की कोशिश करे। इस स्थिति में संतुलन रखने के लिए आप आगे फर्श का सहयोग ले सकते है।  पहली बार इसे करने के लिए आप १० सेकंड कर सकते है। दूसरी बार करने पर समय को बढ़ाये।

 

4. Wide Legged Child’s Pose

वाइड पेअर वाले बच्चे की मुद्रा पेट को काम करने और वेट को मिटने के लिए सबसे बेहतरीन योग है। यह योगासन जांघो को मजबूती देता है और एड़ियों की कठोरता से रहत देने में मदद करता है। इस मुद्रा का अभ्यास करने से शांति और विश्राम मिलती है और तनाव और थकान के प्रभावों को कम कर देता है।bachha paida karne ke baad vajan pet ko kaise ghataye

उप्पेर दिखाए गए पिक्चर की तरह अपने दोनों पैरो के उप्पर अपने जांघ और हिप को मिलाये। अब अपने दोनों हाथो और सर को ज़मीन पर मिलाये और शरीर को धीमा कर दे। और इस स्थिति में आप अपनी आँखों को बंद कर सांस पर ध्यान दे और १० से १५ सेकंड इस स्थिति में रह सकते है। धीरे धीरे सांस को छोड़ते हुए आप अपने पहली स्थिति में आ जाये। पहली बार इस मुद्रा को आप ५ से १० बार करे।

5. उष्ट्रासन

उष्ट्रासन पीठ और कंधे की मांसपेशियों को खिचाव में बेहद फायदेमंद है। यह गर्भवस्था के बाद पेट को काम करने का सबसे बढ़िया योग है। यह मांशपेशियों में खिचाव लाता है इसके अलावा यह अस्थमा, थायरॉयड और पैराथाइरोइड विकारों और स्पॉन्डिलाइटिस के उपचार में भी मदद करता है।delivery ke baad vajan kam kare

विधि: सबसे पहले आप फर्श पर घुटनों के बल बैठ जाएं या आप वज्रासन में बैठे। घुटनों तथा पैरों के बीच करीब एक फुट की दूरी रखें। अब आप अपने घुटनों पर खड़े हो जाएं। और सांस लेते हुए पीछे की ओर झुकें और अब दाईं हथेली को दाईं एड़ी पर तथा बाईं हथेली को बाईं एड़ी पर रखें। ध्‍यान रहे कि पीछे झुकते समय गर्दन को झटका न लगे। अंतिम मुद्रा में जांघें फर्श से समकोण बनाती हुई होंगी और सिर पीछे की ओर झुका होगा। इस मुद्रा में शरीर का वजन बांहों तथा पांवों पर समान रूप से होना चाहिए। धीरे धीरे सांस ले और धीरे धीरे सांस छोड़े। और फिर लंबी गहरी सांस छोड़ते अपनी आरंभिक अवस्था में आएं। इस तरह से आप इसको पांच से सात बार कर सकते हैं।

6. त्रिकोनासन

नयी माता के लिए त्रिकोणासन बहुत ही फायदेमंद होता है। यह पेट की वासा को खोने और कमर के आकर को काम करने के लिए लाभकारी होता है। यह आसान पैरो, एड़ियों, हाथो और वक्ष को मजबूत बनाता है। यह पेट, पैरो और हाथो की मासपेशिओं में खिचाव करता है और उन्हें अपनी प्रारंभिक अवस्था में लेन का काम करता है।trikonasana yoga pregnancy ke baad motapan ghatane ke liye

विधि: सबसे पहले आप सीधे खड़े हो जाये अब अपने पैरो के बीच की दुरी सुविधाजनक रूप (लगभग ३ से ४ फिट) से बना ले। अब अपने दाहिने पंजे को ९० डिग्री और बाये पंजे को १५ डिग्री घुमाये। अपनी दाहिनी एड़ी के केंद्र को अपने बाएँ पैर से बन रहे घुमाव के केंद्र की सीध में लेकर आएँ। सुनिश्चित करें की आपके पंजे जमीन को दबा रहे हों और शरीर का भार दोनों पैरों पर समान रूप से हो। एक गहरी श्वास अन्दर की ओर लें, श्वास बाहर की ओर छोड़ते हुए अपने शरीर को दाहिने तरफ मोड़ें, कूल्हों से नीचे की तरफ जाएँ, कमर को सीधा रखते हुए अपने बाएँ हाथ को ऊपर हवा में उठाएँ और दाहिने हाथ को नीचे जमीन की तरफ ले जाएँ। इस प्रकार अपने दोनों हाथों को एक सीध में रखें।

अपने दाहिने हाथ को एड़ी या जमीन पर बाहर की तरफ रखें अथवा अपनी कमर को बिना मोड़े हुए जहाँ भी संभव हो रख सकते हैं| अपने बाएँ हाथ को छत की ओर खींचे और कंधो की सीध में ले आएँ।
अपने सिर को बीच में रखे या बाहिनी ओर मोड़ लें, आँखों की दृष्टि को बहिनी हथेली की ओर केंद्रित करें|

ध्यान रखें की आपका शरीर किनारे की तरफ से मुड़ा हुआ हो| शरीर आगे या पीछे की ओर झुका न हो।
नितम्ब तथा वक्ष पूरी तरह से खुले रहें। शरीर में अधिकतम खिंचाव बनाए रखते हुए स्थिर रहें। गहरी श्वासें लेते रहें। बाहर जाती हुई प्रत्येक श्वास के साथ शरीर को विश्राम दें| अपने शरीर एवं श्वास के साथ मनःस्थित रहें। जब भी श्वास लें, ऊपर की ओर उठें, अपने हाथों को नीचे की तरफ लाएँ और पैरों को सीधा करें। यही प्रक्रिया अपनी दूसरी तरफ से भी करें|

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